Agar be'garz ho jazba,
Agar manzil bane rasta,
Agar chahat ke parde mein,
Koi lalach na ho lipta,
Agar tum saunp do sab kuch,
Sile mein kuch na mango to,
Agar sauda na ho koi,
Mohabbat bas mohabbat ho,
To fir ye sukh hi deti hai,
Kabhi dukh nahi deti,
Mohabbat dukh nahi deti...!!!
**********
अगर बे'गरज हो जज्बा,
अगर मंजिल बने रस्ता,
अगर चाहत के परदे में,
कोई लालच ना हो लिपटा,
अगर तुम सौंप दो सब कुछ,
सिले में कुछ ना मांगो तो,
अगर सौदा ना हो कोई,
मोहब्बत बस मोहब्बत हो,
तो फिर ये सुख ही देती है,
कभी दुःख नहीं देती,
मोहब्बत दुःख नहीं देती...!!!
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Sunday, February 20, 2011
Monday, August 31, 2009
मुझे भुला के दिखा (Mujhe Bhula Ke Dikha)
तूं अपने फन से मेरी चाहत को अजमा के दिखा,
मैं टूट'ता हूँ तूं फिर से मुझे बना के दिखा,
तेरे बदन में लहू बन के दौड़ता हूँ मैं,
तुझे खुदा की कसम है मुझे भुला के दिखा,
मैं इतने दर्द में भी क़हक़हे लगाता हूँ,
तूं एक दुःख में सिर्फ मुझे मुस्कुरा के दिखा,
तुझे तो मैंने हमेशा मनाया है लेकिन,
मैं आज रूठ चला हूँ मुझे मना के दिखा...!!!
मैं टूट'ता हूँ तूं फिर से मुझे बना के दिखा,
तेरे बदन में लहू बन के दौड़ता हूँ मैं,
तुझे खुदा की कसम है मुझे भुला के दिखा,
मैं इतने दर्द में भी क़हक़हे लगाता हूँ,
तूं एक दुःख में सिर्फ मुझे मुस्कुरा के दिखा,
तुझे तो मैंने हमेशा मनाया है लेकिन,
मैं आज रूठ चला हूँ मुझे मना के दिखा...!!!
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