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Tuesday, March 15, 2011

Meri Saans Ruk Jaye

Labon ki sarsarahat se, Badan ke choor hone tak,
Main tujhko is tarah chahun, Ke meri saans ruk jaye,

Khata'on par khata'en hon, Aur na ho baat kehne ko,
Main tujh mein yoon samaa jaun, Ke meri saans ruk jaye,

Na himmat tujh mein ho baki, Na himmat mujh mein ho baki,
Magar itna kareeb aaun, Ke meri saan ruk jaye,

Tere honthon pe jab rakhun, Main apne honth kuch aise,
Ya teri pyas bujh jaye, Ya meri saans ruk jaye...!!!

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लबों की सरसराहट से, बदन के चूर होने तक,
मैं तुझको इस तरह चाहूँ, के मेरी साँस रुक जाये,

खताओं पर खताएं हों, और ना हो बात कहने को,
मैं तुझमें यूं समा जाऊं, के मेरी साँस रुक जाये,

ना हिम्मत तुझमें हो बाकी, ना हिम्मत मुझमें हो बाकी,
मगर इतना करीब आऊं, के मेरी साँस रुक जाये,

तेरे होंठों पे जब रखूँ, मैं अपने होंठ कुछ ऐसे,
या तेरी प्यास बुझ जाये, या मेरी रुक जाये...!!!

Thursday, December 24, 2009

Uss Waqt Teri Yaad Aati Hai

Jab yun hi kabhi baithe baithe,
Kuch yaad achanak aa jaye,
Har baat se dil bezaar sa ho,
Har cheez se dil ghabra jaye,
Karna bhi mujhe kuch aur hi ho,
Kuch aur hi mujhse ho jaye,
Kuch aur hi sochun dil me main,
Kuch aur honthon pe aa jaye,

Jab chandni dil ke aangan me,
kuch kahne mujh se aa jaye,
Ik khwab jahen se chhoote koi,
Ahsaas pe mere chhaa jaye,
Jab zulf pareshan chehre pe,
kuch aur pareshan ho jaye,
Kuch dard bhi dil me hone lage,
Aur saans bhi bojhal ho jaye,

Jab sham dhale chalte chalte,
Manzil ka na koi naam mile,
Hansta hua ik aaghaz mile,
Rota hua ik anzaam mile,
Palkon ke larazte ashkon se,
Is dil ko koi paigam mile,
Aur sari wafaon ke badle,
Mujh ko hi koi ilzaam mile,

Aise hi kisi ek lamhe me,
Chupke se kabhi khamoshi me,
Kuch phool achanak khil jayein,
Kuch beete lamhe yaad aa jayein,
Uss waqt teri yaad aati hai,
Shiddat se teri yaad aati hai...!!!

**********

जब यूं ही कभी बैठे बैठे,
कुछ याद अचानक आ जाये,
हर बात से दिल बेज़ार सा हो,
हर चीज़ से दिल घबरा जाये,
करना भी मुझे कुछ और ही हो,
कुछ और ही मुझसे हो जाये,
कुछ और ही सोचूं दिल में मैं,
कुछ और ही होंठों पे आ जाये,

जब चांदनी दिल के आंगन में,
कुछ कहने मुझ से आ जाये,
इक ख्वाब ज़हन से छूटे कोई,
अहसास पे मेरे छा जाये,
जब ज़ुल्फ परेशां चेहरे पे,
कुछ और परेशां हो जाये,
कुछ दर्द भी दिल में होने लगे,
और सांस भी बोझल हो जाये,

जब शाम ढ़ले चलते चलते,
मंज़िल का कोई नाम ना मिले,
हंसता हुआ इक आगाज़ मिले,
रोता हुआ इक अंज़ाम मिले,
इस दिल को कोई पैगाम मिले,
और सारी वफाओं के बदले,
मुझ को ही कोई इल्ज़ाम मिले,

ऐसे ही किसी एक लम्हे में,
चुपके से कभी खामोशी में,
कुछ फूल अचानक खिल जायें,
कुछ बीते लम्हे याद आ जायें,
उस वक़्त तेरी याद आती है,
शिद्दत से तेरी याद आती है...!!!

Wednesday, September 16, 2009

हर सजा हमें मंज़ूर है - Har Saza Hamein Manzoor Hai

हर सांस में उसका नूर है,
पर दीद से कितना दूर है,
चलो चाँद से बात करें,
वो क्यों इतना मग़रूर है,
रोज़ ० शब् पत्थर सोते,
नक्काश मगर मजबूर है,
जाना खली हाथ है सबको,
ज़माने का दस्तूर है,
दगा कलम से नहीं करेंगे,
हर सजा हमें मंज़ूर है,
पता पूछती है रुसवाई
नाम जिसका मशहूर है,
दर्द वो जाने क्या ज़ुल्मत का,
हर पल जहाँ पे नूर है,
तुम भी सो जाओ अहसास,
अभी शब् जरा मखमूर है...!!!

Wednesday, September 9, 2009

घर आओ किसी दिन - Ghar Aao Kisi Din

चेहरे पे मेरे जुल्फ को फैलाओ किसी दिन,
क्या रोज़ गरजते हो बरस जाओ किसी दिन,

राजों की तरह उतरो मेरे दिल में किसी शब्,
दस्तक पे मेरे हाथ की खुल जाओ किसी दिन,

पैरों की तरह हुस्न की बारिश में नहा लो,
बादल की तरह झूम के घर आओ किसी दिन,

खुशबू की तरह गुजरो मेरे दिल की गली से,
फूलों की तरह मुझ पे बिखर जाओ किसी दिन,

फिर हाथ की खैरात मिले बंद कुबा को,
फिर लुत्फ़ शब्-ए-वस्ल को दोहराओ किसी दिन,

गुजरें जो मेरे घर से तो रुक जाएँ सितारे,
कुछ इस तरह मेरी रात को चमकाओ किसी दिन,

मैं अपनी हर इक सांस उसी रात को दे दूं,
सर रख के मेरे सीने पे सो जाओ किसी दिन...!!!